vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 74: गौओंके लोक और गोदानविषयक युधिष्ठिर और इन्द्रके प्रश्न
»
श्लोक 2
श्लोक
13.74.2
नृगेण च महद्दु:खमनुभूतं महात्मना।
एकापराधादज्ञानात् पितामह महामते॥ २॥
अनुवाद
महामते पितामह! महात्मा राजा नृग को अनजाने में किये गये एक अपराध के कारण महान दुःख सहना पड़ा था ॥2॥
Mahamate Pitamah! Mahatma King Nriga had suffered great sorrow because of a single crime he had committed unknowingly. 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×