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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 73: पिताके शापसे नाचिकेतका यमराजके पास जाना और यमराजका नाचिकेतको गोदानकी महिमा बताना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.73.7 
क्षुत्पिपासाश्रमाविष्टो मुनिरुद्दालकिस्तदा।
यमं पश्येति तं पुत्रमशपत् स महातपा:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उस समय महातपस्वी उद्दालक मुनि भूख-प्यास से व्याकुल थे। वे क्रोधित होकर बोले, "तुम यह सब क्यों देख रहे हो? जाओ और यमराज के पास जाओ।" इस प्रकार उन्होंने उसे श्राप दे दिया।
 
At that time the great ascetic Uddalaka Muni was suffering from hunger and thirst. So he became angry and said, "Why should you see all that? Go and see Yamaraja." Thus he cursed him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)