Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.73.53: जो मनुष्य एक हजार, एक सौ, दस या पाँच गौएँ अच्छे बछड़ों सहित दान करता है अथवा किसी कुलीन ब्राह्मण को एक ही गाय दान करता है, उसके लिए वह गाय परलोक में पवित्र तीर्थों की नदी बन जाती है॥ 53॥   |   mahabharat अध्याय 13.73: पिताके शापसे नाचिकेतका यमराजके पास जाना और यमराजका नाचिकेतको गोदानकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 73: पिताके शापसे नाचिकेतका यमराजके पास जाना और यमराजका नाचिकेतको गोदानकी महिमा बताना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  13.73.53 
यैस्तद् दत्तं गोसहस्रं शतं वा
दशार्धं वा दश वा साधुवत्सम्।
अप्येका वै साधवे ब्राह्मणाय
सास्यामुष्मिन् पुण्यतीर्था नदी वै॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य एक हजार, एक सौ, दस या पाँच गौएँ अच्छे बछड़ों सहित दान करता है अथवा किसी कुलीन ब्राह्मण को एक ही गाय दान करता है, उसके लिए वह गाय परलोक में पवित्र तीर्थों की नदी बन जाती है॥ 53॥
 
For a person who makes donation of a thousand, a hundred, ten or five cows along with their good calves or gives away just one cow to a noble Brahmin, that cow becomes for him a river of holy pilgrimages in the next world.॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)