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mahabharat 13.73.49: इस गौधन को उचित रीति से प्राप्त करके ब्राह्मणों को दान करना चाहिए और योग्य व्यक्ति की परीक्षा करके, योग्य व्यक्ति को दी गई गाय उसके घर भेज देनी चाहिए। तथा किसी भी शुभ अष्टमी से आरम्भ करके दस दिन तक गाय का दूध, गोबर या गोमूत्र खाकर रहना चाहिए।॥ 49॥   |   mahabharat अध्याय 13.73: पिताके शापसे नाचिकेतका यमराजके पास जाना और यमराजका नाचिकेतको गोदानकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 73: पिताके शापसे नाचिकेतका यमराजके पास जाना और यमराजका नाचिकेतको गोदानकी महिमा बताना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  13.73.49 
एतद् दानं न्यायलब्धं द्विजेभ्य:
पात्रे दत्तं प्रापणीयं परीक्ष्य।
काम्याष्टम्या वर्तितव्यं दशाहं
रसैर्गवां शकृता प्रस्नवैर्वा॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
इस गौधन को उचित रीति से प्राप्त करके ब्राह्मणों को दान करना चाहिए और योग्य व्यक्ति की परीक्षा करके, योग्य व्यक्ति को दी गई गाय उसके घर भेज देनी चाहिए। तथा किसी भी शुभ अष्टमी से आरम्भ करके दस दिन तक गाय का दूध, गोबर या गोमूत्र खाकर रहना चाहिए।॥ 49॥
 
This cattle wealth acquired through fair means should be donated to Brahmins and after testing the deserving person, the cow given to a worthy person should be sent to his house. And starting from any auspicious Ashtami (eighth day of the Hindu calendar), one should live for ten days by eating cow's milk, cow dung or cow urine.॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)