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mahabharat 13.73.42: हे धर्म से कभी विचलित न होने वाले पूज्य पिता! इस प्रकार धर्मराज ने मुझे वहाँ ये सब स्थान दिखाए। वह सब देखकर मैं बहुत प्रसन्न हुआ॥42॥   |   mahabharat अध्याय 13.73: पिताके शापसे नाचिकेतका यमराजके पास जाना और यमराजका नाचिकेतको गोदानकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.73.42 
एवमेतानि मे तत्र धर्मराजो न्यदर्शयत् ।
दृष्ट्वा च परमं हर्षमवापमहमच्युत॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
हे धर्म से कभी विचलित न होने वाले पूज्य पिता! इस प्रकार धर्मराज ने मुझे वहाँ ये सब स्थान दिखाए। वह सब देखकर मैं बहुत प्रसन्न हुआ॥42॥
 
O revered father who never deviates from Dharma! In this way Dharmaraja showed me all these places there. Seeing all that I got very happy. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)