Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.73.37: नचिकेता कहते हैं - वैवस्वत यम के वचन सुनकर मैंने उनसे पुनः पूछा - 'भगवन्! यदि साधन के अभाव में गौ का दान नहीं किया जा सकता, तो मनुष्य उन लोकों में कैसे जा सकता है, जो केवल गौदान करने वालों को ही उपलब्ध होते हैं?' | mahabharat अध्याय 13.73: पिताके शापसे नाचिकेतका यमराजके पास जाना और यमराजका नाचिकेतको गोदानकी महिमा बताना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नाचिकेत उवाच
श्रुत्वा वैवस्वतवचस्तमहं पुनरब्रुवम्।
अभावे गोप्रदातॄणां कथं लोकान् हि गच्छति॥ ३७॥
अनुवाद
नचिकेता कहते हैं - वैवस्वत यम के वचन सुनकर मैंने उनसे पुनः पूछा - 'भगवन्! यदि साधन के अभाव में गौ का दान नहीं किया जा सकता, तो मनुष्य उन लोकों में कैसे जा सकता है, जो केवल गौदान करने वालों को ही उपलब्ध होते हैं?'
Nachiketa says - After listening to the words of Vaivasvat Yama, I again asked him - 'Lord! If due to lack of resources a cow cannot be donated, then how can a man go to the worlds which are available only to those who donate cows?'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥