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mahabharat 13.73.35-36: जो ब्राह्मण गौओं के प्रति क्षमाशील, उनकी रक्षा करने में समर्थ, कृतज्ञ और जीविका से रहित हो, वह गौदान के लिए श्रेष्ठ कहा गया है। जो वृद्ध हो, रोग के कारण पौष्टिक आहार की आवश्यकता हो, अकाल आदि से चिन्तित हो, कोई महान यज्ञ करने जा रहा हो या जिसके लिए कृषि कार्य आवश्यक हो, होम के लिए प्रसाद प्राप्त करना चाहता हो या किसी स्त्री को बच्चा होने वाला हो या गुरु को दक्षिणा देनी हो या बच्चे के पोषण के लिए गौदुग्ध की आवश्यकता हो, ऐसे व्यक्तियों के लिए ऐसे अवसरों पर गौदान हेतु सामान्य स्थान और समय माना गया है (ऐसे समय में स्थान और समय का विचार नहीं करना चाहिए)। जिन गौओं के विशेष रहस्य ज्ञात हों, जो खरीदकर लाई गई हों या ज्ञान के पुरस्कार में प्राप्त हुई हों या पशुओं के आदान-प्रदान से खरीदी गई हों या जीतकर लाई गई हों या दहेज में प्राप्त हुई हों, ऐसी गौएं दान के लिए श्रेष्ठ मानी गई हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.73: पिताके शापसे नाचिकेतका यमराजके पास जाना और यमराजका नाचिकेतको गोदानकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 73: पिताके शापसे नाचिकेतका यमराजके पास जाना और यमराजका नाचिकेतको गोदानकी महिमा बताना  »  श्लोक 35-36
 
 
श्लोक  13.73.35-36 
गोषु क्षान्तं गोशरण्यं कृतज्ञं
वृत्तिग्लानं तादृशं पात्रमाहु:।
वृद्धे ग्लाने सम्भ्रमे वा महार्थे
कृष्यर्थं वा होम्यहेतो: प्रसूत्याम्॥ ३५॥
गुर्वर्थं वा बालपुष्ट्याभिषंगां
गां वै दातुं देशकालोऽविशिष्ट:।
अन्तर्ज्ञाता: सक्रयज्ञानलब्धा:
प्राणक्रीता निर्जिता यौतकाश्च॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
जो ब्राह्मण गौओं के प्रति क्षमाशील, उनकी रक्षा करने में समर्थ, कृतज्ञ और जीविका से रहित हो, वह गौदान के लिए श्रेष्ठ कहा गया है। जो वृद्ध हो, रोग के कारण पौष्टिक आहार की आवश्यकता हो, अकाल आदि से चिन्तित हो, कोई महान यज्ञ करने जा रहा हो या जिसके लिए कृषि कार्य आवश्यक हो, होम के लिए प्रसाद प्राप्त करना चाहता हो या किसी स्त्री को बच्चा होने वाला हो या गुरु को दक्षिणा देनी हो या बच्चे के पोषण के लिए गौदुग्ध की आवश्यकता हो, ऐसे व्यक्तियों के लिए ऐसे अवसरों पर गौदान हेतु सामान्य स्थान और समय माना गया है (ऐसे समय में स्थान और समय का विचार नहीं करना चाहिए)। जिन गौओं के विशेष रहस्य ज्ञात हों, जो खरीदकर लाई गई हों या ज्ञान के पुरस्कार में प्राप्त हुई हों या पशुओं के आदान-प्रदान से खरीदी गई हों या जीतकर लाई गई हों या दहेज में प्राप्त हुई हों, ऐसी गौएं दान के लिए श्रेष्ठ मानी गई हैं।
 
A Brahmin who is forgiving towards cows, capable of protecting them, grateful and devoid of livelihood, is said to be the best person to donate cows. One who is old, needs nutritious food due to illness, is worried due to famine etc., is about to perform a great yagya or for whom farming is required, wishes to obtain offerings for the homa or a woman is about to give birth to a child or has to give dakshina to the guru or there is a need for cow milk for the nourishment of a child, such persons have been considered to have a normal place and time for donating cows on such occasions (place and time should not be considered at such times). Cows whose special secrets are known, which have been brought by purchase or have been received as a reward for knowledge or have been bought by exchanging animals or have been brought by winning or have been received in dowry, such cows are considered to be the best for donation.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)