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mahabharat 13.73.30: "वाप्रवर! केवल उनका दान शुभ नहीं है; योग्य ब्राह्मण, उचित समय, विशेष गौ और दान की उत्तम विधि जानकर ही गौओं का दान करना चाहिए। गौओं और अन्य का सम्बन्ध जानना बहुत कठिन है और जो अग्नि और सूर्य के समान तेजस्वी है, उसे पहचानना भी सरल नहीं है॥30॥   |   mahabharat अध्याय 13.73: पिताके शापसे नाचिकेतका यमराजके पास जाना और यमराजका नाचिकेतको गोदानकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 73: पिताके शापसे नाचिकेतका यमराजके पास जाना और यमराजका नाचिकेतको गोदानकी महिमा बताना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  13.73.30 
न त्वेतासां दानमात्रं प्रशस्तं
पात्रं कालो गोविशेषो विधिश्च।
ज्ञात्वा देयं विप्र गवान्तरं हि
दु:खं ज्ञातुं पावकादित्यभूतम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
"वाप्रवर! केवल उनका दान शुभ नहीं है; योग्य ब्राह्मण, उचित समय, विशेष गौ और दान की उत्तम विधि जानकर ही गौओं का दान करना चाहिए। गौओं और अन्य का सम्बन्ध जानना बहुत कठिन है और जो अग्नि और सूर्य के समान तेजस्वी है, उसे पहचानना भी सरल नहीं है॥30॥
 
"Vaapravar! Only their donation is not auspicious; one should donate cows only after knowing about the deserving Brahmin, the right time, the special cow and the best method of donation. It is very difficult to know the relationship between cows and others and it is not easy to recognize the person who is as radiant as the fire and the sun.॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)