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mahabharat 13.73.20: उनके ऐसा कहने पर मैंने इस प्रकार उत्तर दिया - 'प्रभु! मैं आपके राज्य में आया हूँ, जहाँ से लौटना अत्यन्त कठिन है। यदि मैं आपकी दृष्टि में वर पाने योग्य हूँ, तो मैं पुण्यात्मा पुरुषों को उपलब्ध होने वाले सुखमय लोकों को देखना चाहता हूँ।'   |   mahabharat अध्याय 13.73: पिताके शापसे नाचिकेतका यमराजके पास जाना और यमराजका नाचिकेतको गोदानकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 73: पिताके शापसे नाचिकेतका यमराजके पास जाना और यमराजका नाचिकेतको गोदानकी महिमा बताना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  13.73.20 
तेनैवमुक्तस्तमहं प्रत्यवोचं
प्राप्तोऽस्मि ते विषयं दुर्निवर्त्यम्।
इच्छाम्यहं पुण्यकृतां समृद्धान्
लोकान् द्रष्टुं यदि तेऽहं वरार्ह:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
उनके ऐसा कहने पर मैंने इस प्रकार उत्तर दिया - 'प्रभु! मैं आपके राज्य में आया हूँ, जहाँ से लौटना अत्यन्त कठिन है। यदि मैं आपकी दृष्टि में वर पाने योग्य हूँ, तो मैं पुण्यात्मा पुरुषों को उपलब्ध होने वाले सुखमय लोकों को देखना चाहता हूँ।'
 
‘When he said this, I replied like this - ‘Lord! I have come to your kingdom, from where it is very difficult to return. If I am worthy of getting a boon in your eyes, then I want to see the prosperous worlds available to virtuous men.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)