Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.73.18: तब यमराज ने मुझसे कहा- "सौम्य! तुम मरे नहीं हो। तुम्हारे तपस्वी पिता ने तो केवल इतना कहा था कि तुम यमराज की ओर देखो। ब्राह्मण! तुम्हारे पिता प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी हैं। उनकी बात झूठी सिद्ध नहीं हो सकती॥18॥ | mahabharat अध्याय 13.73: पिताके शापसे नाचिकेतका यमराजके पास जाना और यमराजका नाचिकेतको गोदानकी महिमा बताना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यमोऽब्रवीन्मां न मृतोऽसि सौम्य
यमं पश्येत्याह स त्वां तपस्वी।
पिता प्रदीप्ताग्निसमानतेजा
न तच्छक्यमनृतं विप्र कर्तुम्॥ १८॥
अनुवाद
तब यमराज ने मुझसे कहा- "सौम्य! तुम मरे नहीं हो। तुम्हारे तपस्वी पिता ने तो केवल इतना कहा था कि तुम यमराज की ओर देखो। ब्राह्मण! तुम्हारे पिता प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी हैं। उनकी बात झूठी सिद्ध नहीं हो सकती॥18॥
Then Yamraj said to me- "Soumya! You are not dead. Your ascetic father had only said that you should look at Yamraj. Brahmin! Your father is as radiant as a blazing fire. His words cannot be proved false.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥