Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.73.17: तत्पश्चात् समस्त गणों से घिरे हुए और उनके द्वारा पूजित होकर मैंने वैवस्वत यम से धीरे से कहा - 'धर्मराज! मैं आपके राज्य में आया हूँ; कृपया मुझे उन लोकों में जाने की अनुमति दीजिए जहाँ मैं जाने में समर्थ हूँ।'॥17॥ | mahabharat अध्याय 13.73: पिताके शापसे नाचिकेतका यमराजके पास जाना और यमराजका नाचिकेतको गोदानकी महिमा बताना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् समस्त गणों से घिरे हुए और उनके द्वारा पूजित होकर मैंने वैवस्वत यम से धीरे से कहा - 'धर्मराज! मैं आपके राज्य में आया हूँ; कृपया मुझे उन लोकों में जाने की अनुमति दीजिए जहाँ मैं जाने में समर्थ हूँ।'॥17॥
‘Then, being surrounded by all the members and being worshipped by them, I softly addressed Vaivasvata Yama, 'Dharmaraj, I have come to your kingdom; please permit me to go to the worlds I am capable of going to.'॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥