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mahabharat 13.73.15: ‘पिताजी! आपकी आज्ञा का पालन करने के लिए मैं तुरंत यहाँ से चला और सुन्दर कान्ति और वैभव से परिपूर्ण विशाल यमपुरी में पहुँचकर मैंने वहाँ का दरबार देखा, जो सुवर्ण के समान सुन्दर कान्ति से जगमगा रहा था। उसकी प्रभा हजारों योजन दूर तक फैली हुई थी॥ 15॥   |   mahabharat अध्याय 13.73: पिताके शापसे नाचिकेतका यमराजके पास जाना और यमराजका नाचिकेतको गोदानकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.73.15 
कुर्वन् भवच्छासनमाशु यातो
ह्यहं विशालां रुचिरप्रभावाम्।
वैवस्वतीं प्राप्य सभामपश्यं
सहस्रशो योजनहेमभासम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
‘पिताजी! आपकी आज्ञा का पालन करने के लिए मैं तुरंत यहाँ से चला और सुन्दर कान्ति और वैभव से परिपूर्ण विशाल यमपुरी में पहुँचकर मैंने वहाँ का दरबार देखा, जो सुवर्ण के समान सुन्दर कान्ति से जगमगा रहा था। उसकी प्रभा हजारों योजन दूर तक फैली हुई थी॥ 15॥
 
‘Father! I immediately left from here to obey your orders and on reaching the huge Yampuri which was full of beautiful radiance and splendor, I saw the court there, which was shining with a beautiful radiance like gold. Its brilliance was spread thousands of yojanas away.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)