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mahabharat 13.73.12: महर्षिक, वह पुत्र मरकर ऐसे लौटा जैसे नींद से जाग गया हो। उसका शरीर दिव्य सुगन्धि से व्याप्त था। उस समय उद्दालक ने उससे पूछा -॥12॥   |   mahabharat अध्याय 13.73: पिताके शापसे नाचिकेतका यमराजके पास जाना और यमराजका नाचिकेतको गोदानकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 73: पिताके शापसे नाचिकेतका यमराजके पास जाना और यमराजका नाचिकेतको गोदानकी महिमा बताना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  13.73.12 
स पर्यपृच्छत् तं पुत्रं क्षीणं पर्यागतं पुन:।
दिव्यैर्गन्धै: समादिग्धं क्षीणस्वप्नमिवोत्थितम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
महर्षिक, वह पुत्र मरकर ऐसे लौटा जैसे नींद से जाग गया हो। उसका शरीर दिव्य सुगन्धि से व्याप्त था। उस समय उद्दालक ने उससे पूछा -॥12॥
 
Maharshika, that son died and returned as if he had woken up from sleep. His body was permeated with divine fragrance. At that time Uddalaka asked him -॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)