Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.73.1: युधिष्ठिर ने पूछा - हे निष्पाप महाबाहु! गौदान से प्राप्त होने वाले फल को विस्तारपूर्वक कहिए। आपके वचनों को सुनकर मुझे तृप्ति नहीं मिलती, अतः अब और अधिक बताइए। 1॥ | mahabharat अध्याय 13.73: पिताके शापसे नाचिकेतका यमराजके पास जाना और यमराजका नाचिकेतको गोदानकी महिमा बताना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर उवाच
दत्तानां फलसम्प्राप्तिं गवां प्रब्रूहि मेऽनघ।
विस्तरेण महाबाहो न हि तृप्यामि कथ्यताम्॥ १॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - हे निष्पाप महाबाहु! गौदान से प्राप्त होने वाले फल को विस्तारपूर्वक कहिए। आपके वचनों को सुनकर मुझे तृप्ति नहीं मिलती, अतः अब और अधिक बताइए। 1॥
Yudhishthir asked – Sinless great-armed one! Tell me in detail the fruits that are obtained from the donation of cows. I don't get satisfaction from listening to your words, so tell me more now. 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥