Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.72.8: उनके वचन सुनकर भगवान श्रीकृष्ण ने पूछा - 'राजन्! आपने सदैव पुण्य कर्म ही किए हैं, कभी कोई पाप कर्म नहीं किया, फिर आपकी ऐसी दुर्दशा कैसे हुई? मुझे बताइए, आपको ऐसा दुःख क्यों भोगना पड़ा?॥ 8॥ | mahabharat अध्याय 13.72: ब्राह्मणके धनका अपहरण करनेसे होने वाली हानिके विषयमें दृष्टान्तके रूपमें राजा नृगका उपाख्यान । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथा ब्रुवाणं तु तमाह माधव:
शुभं त्वया कर्म कृतं न पापकम्।
कथं भवान् दुर्गतिमीदृशीं गतो
नरेन्द्र तद् ब्रूहि किमेतदीदृशम्॥ ८॥
अनुवाद
उनके वचन सुनकर भगवान श्रीकृष्ण ने पूछा - 'राजन्! आपने सदैव पुण्य कर्म ही किए हैं, कभी कोई पाप कर्म नहीं किया, फिर आपकी ऐसी दुर्दशा कैसे हुई? मुझे बताइए, आपको ऐसा दुःख क्यों भोगना पड़ा?॥ 8॥
Hearing his words, Lord Krishna asked - 'King! You have always performed pious deeds, never committed any sinful act, then how did you fall into such a bad condition? Tell me, why did you have to undergo such suffering?॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥