Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.72.7: यह सुनकर भगवान कृष्ण उस कुएँ के पास गए। उन्होंने गिरगिट को कुएँ से बाहर निकाला और अपने पवित्र करकमलों के स्पर्श से राजा नृग का उद्धार किया। इसके बाद उन्होंने उससे उसका परिचय पूछा। तब राजा ने उन्हें अपना परिचय देते हुए कहा - 'प्रभु! मैं पूर्वजन्म में राजा नृग था, जिसने एक हज़ार यज्ञ किए थे।' | mahabharat अध्याय 13.72: ब्राह्मणके धनका अपहरण करनेसे होने वाली हानिके विषयमें दृष्टान्तके रूपमें राजा नृगका उपाख्यान । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यह सुनकर भगवान कृष्ण उस कुएँ के पास गए। उन्होंने गिरगिट को कुएँ से बाहर निकाला और अपने पवित्र करकमलों के स्पर्श से राजा नृग का उद्धार किया। इसके बाद उन्होंने उससे उसका परिचय पूछा। तब राजा ने उन्हें अपना परिचय देते हुए कहा - 'प्रभु! मैं पूर्वजन्म में राजा नृग था, जिसने एक हज़ार यज्ञ किए थे।'
Hearing this, Lord Krishna went to that well. He took the chameleon out of the well and with the touch of his holy hand, he saved King Nriga. After this, he asked him for his introduction. Then the king introduced himself to him and said – 'Prabhu! In my previous life, I was King Nriga, who had performed a thousand yagyas'.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥