Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.72.33: युधिष्ठिर! जैसे गौदान करने से महान फल मिलता है, वैसे ही गौओं के साथ विश्वासघात करने से भी बहुत बुरा फल भोगना पड़ता है; इसलिए गौओं को कभी कष्ट नहीं देना चाहिए॥ 33॥ | mahabharat अध्याय 13.72: ब्राह्मणके धनका अपहरण करनेसे होने वाली हानिके विषयमें दृष्टान्तके रूपमें राजा नृगका उपाख्यान । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर! जैसे गौदान करने से महान फल मिलता है, वैसे ही गौओं के साथ विश्वासघात करने से भी बहुत बुरा फल भोगना पड़ता है; इसलिए गौओं को कभी कष्ट नहीं देना चाहिए॥ 33॥
Yudhishthira! Just as one gets a great reward by donating cows, similarly one has to suffer a very bad consequence by betraying cows; therefore one should never harm cows.॥ 33॥
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि नृगोपाख्याने सप्ततितमोऽध्याय:॥ ७०॥
इसप्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें नृगका उपाख्यानविषयक सत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ ७० ॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥