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श्लोक  13.72.32 
सतां समागम: सद्भिर्नाफल: पार्थ विद्यते।
विमुक्तं नरकात् पश्य नृगं साधुसमागमात्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीपुत्र! यदि कोई सज्जन व्यक्ति अच्छे मनुष्य की संगति करता है, तो उसकी संगति व्यर्थ नहीं जाती। देखो, राजा नृग एक अच्छे मनुष्य की संगति के कारण ही नरक से बच गए थे।
 
Kunti's son! If a gentleman keeps company with a good man, then his company does not go waste. See, King Nriga was saved from hell because of the company of a good man.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)