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mahabharat 13.72.28: ‘श्रीकृष्ण! आज आपने मेरी रक्षा की है। आपकी आध्यात्मिक शक्ति के अतिरिक्त और क्या कारण हो सकता है? अब मुझे अनुमति दीजिए, मैं स्वर्ग जाऊँगा।’॥28॥   |   mahabharat अध्याय 13.72: ब्राह्मणके धनका अपहरण करनेसे होने वाली हानिके विषयमें दृष्टान्तके रूपमें राजा नृगका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.72.28 
त्वया तु तारितोऽस्म्यद्य किमन्यत्र तपोबलात्।
अनुजानीहि मां कृष्ण गच्छेयं दिवमद्य वै॥ २८॥
 
 
अनुवाद
‘श्रीकृष्ण! आज आपने मेरी रक्षा की है। आपकी आध्यात्मिक शक्ति के अतिरिक्त और क्या कारण हो सकता है? अब मुझे अनुमति दीजिए, मैं स्वर्ग जाऊँगा।’॥28॥
 
‘Sri Krishna! Today you have saved me. What other reason can there be except your spiritual power. Now give me permission, I will go to heaven.’॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)