Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.72.27: ‘कुएँ में गिरने पर मैंने देखा कि मुझे गिरगिट का शरीर प्राप्त हो गया है और मेरा सिर नीचे की ओर है। इस रूप में भी मुझे पूर्वजन्मों की स्मृति नहीं छूटी है।॥27॥ | mahabharat अध्याय 13.72: ब्राह्मणके धनका अपहरण करनेसे होने वाली हानिके विषयमें दृष्टान्तके रूपमें राजा नृगका उपाख्यान । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कूपेऽऽत्मानमध:शीर्षमपश्यं पतितश्च ह।
तिर्यग्योनिमनुप्राप्तं न च मामजहात् स्मृति:॥ २७॥
अनुवाद
‘कुएँ में गिरने पर मैंने देखा कि मुझे गिरगिट का शरीर प्राप्त हो गया है और मेरा सिर नीचे की ओर है। इस रूप में भी मुझे पूर्वजन्मों की स्मृति नहीं छूटी है।॥27॥
‘After falling into the well, I saw that I had attained the body of a chameleon and my head was downwards. Even in this form, the memory of my previous births has not left me.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥