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mahabharat 13.72.24: तब मैंने धर्मराज से कहा- प्रभु! पहले मैं पाप भोगूँगा। उसके बाद पुण्य भोगूँगा। ऐसा कहते ही मैं पृथ्वी पर गिर पड़ा॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 13.72: ब्राह्मणके धनका अपहरण करनेसे होने वाली हानिके विषयमें दृष्टान्तके रूपमें राजा नृगका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.72.24 
पूर्वं कृच्छ्रं चरिष्येऽहं पश्चाच्छुभमिति प्रभो।
धर्मराजं ब्रुवन्नेवं पतितोऽस्मि महीतले॥ २४॥
 
 
अनुवाद
तब मैंने धर्मराज से कहा- प्रभु! पहले मैं पाप भोगूँगा। उसके बाद पुण्य भोगूँगा। ऐसा कहते ही मैं पृथ्वी पर गिर पड़ा॥ 24॥
 
‘Then I said to Dharamraj-Prabhu! First I will suffer the sins. After that I will enjoy the virtues. As soon as I said this I fell on the earth.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)