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mahabharat 13.72.23: "तुमने प्रजा के धन की रक्षा करने की प्रतिज्ञा की थी; परंतु उस ब्राह्मण की गाय खो जाने के कारण तुम्हारी प्रतिज्ञा झूठी हो गई। दूसरी बात यह है कि तुमने भूल से ब्राह्मण का धन चुरा लिया था। इस प्रकार तुमने दो प्रकार के अपराध किए हैं।"॥23॥   |   mahabharat अध्याय 13.72: ब्राह्मणके धनका अपहरण करनेसे होने वाली हानिके विषयमें दृष्टान्तके रूपमें राजा नृगका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.72.23 
रक्षितास्मीति चोक्तं ते प्रतिज्ञा चानृता तव।
ब्राह्मणस्वस्य चादानं द्विविधस्ते व्यतिक्रम:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
"तुमने प्रजा के धन की रक्षा करने की प्रतिज्ञा की थी; परंतु उस ब्राह्मण की गाय खो जाने के कारण तुम्हारी प्रतिज्ञा झूठी हो गई। दूसरी बात यह है कि तुमने भूल से ब्राह्मण का धन चुरा लिया था। इस प्रकार तुमने दो प्रकार के अपराध किए हैं।"॥23॥
 
“You had made a vow to protect the wealth of the subjects; but because the cow of that Brahmin got lost, your vow became false. The second thing is that you had stolen the wealth of the Brahmin by mistake. In this way you have committed two types of crimes.”॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)