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mahabharat 13.72.20: ‘इसी बीच काल की प्रेरणा से मेरी मृत्यु हो गई और पितृलोक में पहुंचकर मेरी मुलाकात धर्मराज से हुई।   |   mahabharat अध्याय 13.72: ब्राह्मणके धनका अपहरण करनेसे होने वाली हानिके विषयमें दृष्टान्तके रूपमें राजा नृगका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.72.20 
एतस्मिन्नेव काले तु चोदित: कालधर्मणा।
पितृलोकमहं प्राप्य धर्मराजमुपागमम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
‘इसी बीच काल की प्रेरणा से मेरी मृत्यु हो गई और पितृलोक में पहुंचकर मेरी मुलाकात धर्मराज से हुई।
 
‘In the meanwhile, by the inspiration of time, I died and after reaching Pitriloka, I met Dharamraj.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)