Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.72.2: पार्थ! हमने सुना है कि प्राचीन काल में जब द्वारकापुरी बस रही थी, उस समय वहाँ घास और लताओं से ढका हुआ एक बड़ा कुआँ दिखाई दिया॥ 2॥ | mahabharat अध्याय 13.72: ब्राह्मणके धनका अपहरण करनेसे होने वाली हानिके विषयमें दृष्टान्तके रूपमें राजा नृगका उपाख्यान । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
निविशन्त्यां पुरा पार्थ द्वारवत्यामिति श्रुति:।
अदृश्यत महाकूपस्तृणवीरुत्समावृत:॥ २॥
अनुवाद
पार्थ! हमने सुना है कि प्राचीन काल में जब द्वारकापुरी बस रही थी, उस समय वहाँ घास और लताओं से ढका हुआ एक बड़ा कुआँ दिखाई दिया॥ 2॥
Parth! We have heard that in ancient times when Dwarkapuri was being settled, at that time a large well covered with grass and creepers was seen there.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥