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mahabharat 13.72.19: मैंने उसे सोना, चाँदी, रथ और घोड़े - सब कुछ दिया, परन्तु उस श्रेष्ठ ब्राह्मण ने कुछ भी नहीं लिया और तुरन्त चुपचाप चला गया॥19॥   |   mahabharat अध्याय 13.72: ब्राह्मणके धनका अपहरण करनेसे होने वाली हानिके विषयमें दृष्टान्तके रूपमें राजा नृगका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.72.19 
रुक्ममश्वांश्च ददतो रजतस्यन्दनांस्तथा।
न जग्राह ययौ चापि तदा स ब्राह्मणर्षभ:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
मैंने उसे सोना, चाँदी, रथ और घोड़े - सब कुछ दिया, परन्तु उस श्रेष्ठ ब्राह्मण ने कुछ भी नहीं लिया और तुरन्त चुपचाप चला गया॥19॥
 
I offered him everything - gold, silver, chariots and horses - but that excellent brahmin took nothing and went away immediately in silence.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)