Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.72.18: मधुसूदन! तब उस ब्राह्मण ने कहा - "मैं राजाओं से दान नहीं लेता। मैं स्वयं धन कमाने में समर्थ हूँ। कृपया शीघ्र ही मेरी गाय ला दीजिए।"॥18॥ | mahabharat अध्याय 13.72: ब्राह्मणके धनका अपहरण करनेसे होने वाली हानिके विषयमें दृष्टान्तके रूपमें राजा नृगका उपाख्यान । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्राह्मण उवाच
न राज्ञां प्रतिगृह्णामि शक्तोऽहं स्वस्य मार्गणे।
सैव गौर्दीयतां शीघ्रं ममेति मधुसूदन॥ १८॥
अनुवाद
मधुसूदन! तब उस ब्राह्मण ने कहा - "मैं राजाओं से दान नहीं लेता। मैं स्वयं धन कमाने में समर्थ हूँ। कृपया शीघ्र ही मेरी गाय ला दीजिए।"॥18॥
Madhusudana! Then that Brahmin said, "I do not accept donations from kings. I am capable of earning money for myself. Please bring me my cow soon."॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥