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mahabharat 13.72.17: तब मैंने दूसरे ब्राह्मण से विनती की कि हे प्रभु! इसके बदले में आप मुझसे एक लाख गौएँ ले लीजिए॥17॥   |   mahabharat अध्याय 13.72: ब्राह्मणके धनका अपहरण करनेसे होने वाली हानिके विषयमें दृष्टान्तके रूपमें राजा नृगका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.72.17 
ततस्तमपरं विप्रं याचे विनिमयेन वै।
गवां शतसहस्रं हि तत्कृते गृह्यतामिति॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तब मैंने दूसरे ब्राह्मण से विनती की कि हे प्रभु! इसके बदले में आप मुझसे एक लाख गौएँ ले लीजिए॥17॥
 
Then I requested the other brahmin, 'O Lord! In exchange for this, please take one lakh cows from me.'॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)