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mahabharat 13.72.16: "यह गाय मेरे मातृहीन बच्चे को प्रतिदिन अपने दूध से पोषित करती है; इसलिए मैं इसे कभी नहीं दे सकता।" यह कहकर वह गाय को ले गया।   |   mahabharat अध्याय 13.72: ब्राह्मणके धनका अपहरण करनेसे होने वाली हानिके विषयमें दृष्टान्तके रूपमें राजा नृगका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.72.16 
कृतं च भरते सा गौर्मम पुत्रमपस्तनम्।
न सा शक्या मया दातुमित्युक्त्वा स जगाम ह॥ १६॥
 
 
अनुवाद
"यह गाय मेरे मातृहीन बच्चे को प्रतिदिन अपने दूध से पोषित करती है; इसलिए मैं इसे कभी नहीं दे सकता।" यह कहकर वह गाय को ले गया।
 
"This cow nourishes my motherless child with her milk every day; therefore I can never give it away." Saying this, he took the cow away.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)