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mahabharat 13.72.12: कुछ दिनों के बाद जब वह ब्राह्मण परदेश से लौटा, तो अपनी गाय ढूँढ़ने लगा। ढूँढ़ते-ढूँढ़ते उसे वह गाय किसी दूसरे के घर में मिल गई। तब जिस ब्राह्मण के पास पहले वह गाय थी, उसने दूसरे ब्राह्मण से कहा - 'यह गाय मेरी है।'॥12॥   |   mahabharat अध्याय 13.72: ब्राह्मणके धनका अपहरण करनेसे होने वाली हानिके विषयमें दृष्टान्तके रूपमें राजा नृगका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.72.12 
अपश्यत् परिमार्गंश्च तां गां परगृहे द्विज:।
ममेयमिति चोवाच ब्राह्मणो यस्य साभवत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
कुछ दिनों के बाद जब वह ब्राह्मण परदेश से लौटा, तो अपनी गाय ढूँढ़ने लगा। ढूँढ़ते-ढूँढ़ते उसे वह गाय किसी दूसरे के घर में मिल गई। तब जिस ब्राह्मण के पास पहले वह गाय थी, उसने दूसरे ब्राह्मण से कहा - 'यह गाय मेरी है।'॥12॥
 
‘After some days when that Brahmin returned from abroad, he started looking for his cow. While searching, he found the cow in someone else's house. Then the Brahmin, who had the cow earlier, said to the other Brahmin - 'This cow is mine'.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)