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mahabharat 13.72.10: तब राजा नृग ने भगवान कृष्ण से कहा - 'प्रभु! एक अग्निहोत्री ब्राह्मण विदेश गया हुआ था। उसके पास एक गाय थी, जो एक दिन अपने स्थान से भागकर मेरे गौवंश में आ मिली।'   |   mahabharat अध्याय 13.72: ब्राह्मणके धनका अपहरण करनेसे होने वाली हानिके विषयमें दृष्टान्तके रूपमें राजा नृगका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.72.10 
नृगस्ततोऽब्रवीत् कृष्णं ब्राह्मणस्याग्निहोत्रिण:।
प्रोषितस्य परिभ्रष्टा गौरेका मम गोधने॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तब राजा नृग ने भगवान कृष्ण से कहा - 'प्रभु! एक अग्निहोत्री ब्राह्मण विदेश गया हुआ था। उसके पास एक गाय थी, जो एक दिन अपने स्थान से भागकर मेरे गौवंश में आ मिली।'
 
Then King Nriga said to Lord Krishna - 'Lord! An Agnihotri Brahmin had gone abroad. He had a cow, which one day ran away from its place and joined my herd of cows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)