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mahabharat 13.72.1: भीष्म कहते हैं: हे कुरुश्रेष्ठ! इस विषय में श्रेष्ठ पुरुष वह घटना कहते हैं जिसके अनुसार राजा नृग को एक ब्राह्मण का धन हरण करने के कारण बहुत कष्ट सहना पड़ा था।   |   mahabharat अध्याय 13.72: ब्राह्मणके धनका अपहरण करनेसे होने वाली हानिके विषयमें दृष्टान्तके रूपमें राजा नृगका उपाख्यान   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.72.1 
भीष्म उवाच
अत्रैव कीर्त्यते सद्भिर्ब्राह्मणस्वाभिमर्शने।
नृगेण सुमहत् कृच्छ्रं यदवाप्तं कुरूद्वह॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं: हे कुरुश्रेष्ठ! इस विषय में श्रेष्ठ पुरुष वह घटना कहते हैं जिसके अनुसार राजा नृग को एक ब्राह्मण का धन हरण करने के कारण बहुत कष्ट सहना पड़ा था।
 
Bhishma says: O best of the Kurus! In this matter, the best men narrate the incident according to which King Nriga had to suffer a lot because he had taken away the wealth of a Brahmin.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)