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mahabharat 13.71.5: जो ब्राह्मण अपने शिष्य को धार्मिक ब्राह्मी सरस्वती (वेदवाणी) का उपदेश करता है, उसे भूमिदान और देवदान के समान फल प्राप्त होता है। 5॥   |   mahabharat अध्याय 13.71: गोदानकी महिमा तथा गौओं और ब्राह्मणोंकी रक्षासे पुण्यकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 71: गोदानकी महिमा तथा गौओं और ब्राह्मणोंकी रक्षासे पुण्यकी प्राप्ति  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  13.71.5 
यो ब्रूयाच्चापि शिष्याय धर्म्यां ब्राह्मीं सरस्वतीम्।
पृथिवीगोप्रदानाभ्यां तुल्यं स फलमश्नुते॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जो ब्राह्मण अपने शिष्य को धार्मिक ब्राह्मी सरस्वती (वेदवाणी) का उपदेश करता है, उसे भूमिदान और देवदान के समान फल प्राप्त होता है। 5॥
 
The Brahmin who preaches the religious Brahmi Saraswati (Vedavani) to his disciple, gets the same benefits as a land donation and a God donation. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)