श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 71: गोदानकी महिमा तथा गौओं और ब्राह्मणोंकी रक्षासे पुण्यकी प्राप्ति  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  13.71.22 
शुभे पात्रे ये गुणा गोप्रदाने
तावान् दोषो ब्राह्मणस्वापहारे।
सर्वावस्थं ब्राह्मणस्वापहारो
दाराश्चैषां दूरतो वर्जनीया:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
किसी पुण्यात्मा को गौ दान करने से जो लाभ होता है, उसका धन छीन लेने से उतना ही पाप लगता है; इसलिए किसी भी स्थिति में ब्राह्मणों का धन नहीं हड़पना चाहिए तथा उनकी स्त्रियों का संग दूर से ही नहीं करना चाहिए।
 
Whatever benefits one gets by donating a cow to a virtuous person, taking his money incurs the same sin; hence, under no circumstances should one usurp the wealth of Brahmins and avoid the company of their women from a distance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)