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mahabharat 13.71.10: विद्वान पुरुष को चाहिए कि जब गायें स्वतन्त्र रूप से विचरण करती हों या किसी स्थान पर शांत बैठी हों, तब उन्हें उत्तेजित न करें। जब गायें प्यासी होती हैं और अपने स्वामी की ओर पानी के लिए देखती हैं (और वह उन्हें पानी नहीं देता), तब वे क्रोधित दृष्टि से उसे और उसके बन्धुओं को नष्ट कर देती हैं।॥10॥   |   mahabharat अध्याय 13.71: गोदानकी महिमा तथा गौओं और ब्राह्मणोंकी रक्षासे पुण्यकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 71: गोदानकी महिमा तथा गौओं और ब्राह्मणोंकी रक्षासे पुण्यकी प्राप्ति  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.71.10 
प्रचारे वा निवाते वा बुधो नोद्वेजयेत गा:।
तृषिता ह्यभिवीक्षन्त्यो नरं हन्यु: सबान्धवम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
विद्वान पुरुष को चाहिए कि जब गायें स्वतन्त्र रूप से विचरण करती हों या किसी स्थान पर शांत बैठी हों, तब उन्हें उत्तेजित न करें। जब गायें प्यासी होती हैं और अपने स्वामी की ओर पानी के लिए देखती हैं (और वह उन्हें पानी नहीं देता), तब वे क्रोधित दृष्टि से उसे और उसके बन्धुओं को नष्ट कर देती हैं।॥10॥
 
A learned man should not agitate cows when they are roaming freely or sitting in a place without disturbance. When the cows are thirsty and look at their master for water (and he does not give them water), then with angry glances they destroy him along with his relatives.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)