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श्लोक 13.70.34  |
विवाहांश्चैव कुर्वीत पुत्रानुत्पादयेत च।
पुत्रलाभो हि कौरव्य सर्वलाभाद् विशिष्यते॥ ३४॥ |
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| अनुवाद |
| हे कुरुपुत्र! मनुष्य को विवाह करके पुत्र उत्पन्न करना चाहिए। पुत्र का लाभ अन्य सभी लाभों से बढ़कर है। |
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| O son of Kuru! A man should marry and have a son. The benefit of a son is greater than all other benefits. 34. |
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इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि यमब्राह्मणसंवादे अष्टषष्टितमोऽध्याय:॥ ६८॥
इसप्रकारश्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें यम और ब्राह्मणका संवादविषयक अड़सठवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ ६८ ॥
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