श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 70: तिल, जल, दीप तथा रत्न आदिके दानका माहात्म्य—धर्मराज और ब्राह्मणका संवाद  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  13.70.33 
गाव: सुवर्णं च तथा तिलाश्चैवानुवर्णिता:।
बहुश: पुरुषव्याघ्र वेदप्रामाण्यदर्शनात्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
पुरुषसिंह! मैंने वेदों और शास्त्रों से प्रमाण देकर अनेक बार गौ, स्वर्ण और तिल के दान का माहात्म्य बताया है॥33॥
 
Purusha Singh! I have described the greatness of donating cow, gold and sesame seeds many times by showing evidence from the Vedas and scriptures. 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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