Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.70.30: यदि कोई ब्राह्मण किसी दानकर्ता से रत्नों का दान लेकर उसे अन्य ब्राह्मणों में वितरित कर दे, तो दान देने वाले और लेने वाले दोनों को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है ॥30॥ | mahabharat अध्याय 13.70: तिल, जल, दीप तथा रत्न आदिके दानका माहात्म्य—धर्मराज और ब्राह्मणका संवाद । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि कोई ब्राह्मण किसी दानकर्ता से रत्नों का दान लेकर उसे अन्य ब्राह्मणों में वितरित कर दे, तो दान देने वाले और लेने वाले दोनों को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है ॥30॥
If a Brahmin accepts a donation of gems from a donor and then distributes them among other Brahmins, both the giver and receiver of the donation attain eternal virtue. ॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥