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mahabharat 13.70.3-4: हे मनुष्यों के स्वामी! मध्यदेश में गंगा-यमुना नदी के मध्य में यमुना पर्वत के निचले स्थान पर ब्राह्मणों का एक विशाल एवं सुन्दर गांव था, जो लोगों में पर्णशाला के नाम से प्रसिद्ध था। वहाँ बहुत से विद्वान ब्राह्मण रहते थे।   |   mahabharat अध्याय 13.70: तिल, जल, दीप तथा रत्न आदिके दानका माहात्म्य—धर्मराज और ब्राह्मणका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 70: तिल, जल, दीप तथा रत्न आदिके दानका माहात्म्य—धर्मराज और ब्राह्मणका संवाद  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  13.70.3-4 
मध्यदेशे महान् ग्रामो ब्राह्मणानां बभूव ह।
गंगायमुनयोर्मध्ये यामुनस्य गिरेरध:॥ ३॥
पर्णशालेति विख्यातो रमणीयो नराधिप।
विद्वांसस्तत्र भूयिष्ठा ब्राह्मणाश्चावसंस्तथा॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! मध्यदेश में गंगा-यमुना नदी के मध्य में यमुना पर्वत के निचले स्थान पर ब्राह्मणों का एक विशाल एवं सुन्दर गांव था, जो लोगों में पर्णशाला के नाम से प्रसिद्ध था। वहाँ बहुत से विद्वान ब्राह्मण रहते थे।
 
O Lord of men! In Madhyadesh, in the middle of Ganga-Yamuna river, at a lower place on Yamuna mountain, there was a huge and beautiful village of Brahmins which was famous among the people by the name of Parnasala. Many learned Brahmins lived there. 3-4.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)