| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 70: तिल, जल, दीप तथा रत्न आदिके दानका माहात्म्य—धर्मराज और ब्राह्मणका संवाद » श्लोक 23 |
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| | | | श्लोक 13.70.23  | भीष्म उवाच
इत्युक्ते स तदा तेन यमदूतेन वै गृहान्।
नीतश्च कारयामास सर्वं तद् यमशासनम्॥ २३॥ | | | | | | अनुवाद | | भीष्म कहते हैं - राजन! यमराज की यह बात सुनकर वह ब्राह्मण जाने को तैयार हो गया। यमराज के दूत उसे उसके घर ले गए और उसने यमराज की आज्ञा से सभी पुण्य कर्म किए और करवाए। | | | | Bhishma says - King! On hearing Yamraj say this, the Brahmin was ready to leave. The messenger of Yamraj took him to his home and he did and got done all the pious deeds as per the orders of Yamraj. | | ✨ ai-generated | | |
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