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mahabharat 13.70.20: जो मनुष्य सदैव कल्याण की इच्छा रखते हैं, उन्हें तिल का दान करना चाहिए और अपने घर में सभी प्रकार से तिलों का उपयोग करना चाहिए। इसी प्रकार मनुष्य को भी सदैव दान करना चाहिए और जल पीना चाहिए - इसमें कोई संदेह नहीं है। ॥20॥   |   mahabharat अध्याय 13.70: तिल, जल, दीप तथा रत्न आदिके दानका माहात्म्य—धर्मराज और ब्राह्मणका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 70: तिल, जल, दीप तथा रत्न आदिके दानका माहात्म्य—धर्मराज और ब्राह्मणका संवाद  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  13.70.20 
कार्यं सततमच्छद्भि: श्रेय: सर्वात्मना गृहे।
तथाऽऽप: सर्वदा देया: पेयाश्चैव न संशय:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य सदैव कल्याण की इच्छा रखते हैं, उन्हें तिल का दान करना चाहिए और अपने घर में सभी प्रकार से तिलों का उपयोग करना चाहिए। इसी प्रकार मनुष्य को भी सदैव दान करना चाहिए और जल पीना चाहिए - इसमें कोई संदेह नहीं है। ॥20॥
 
Those who always desire welfare should donate and use sesame seeds in their homes in all possible ways. Similarly, one should always donate and drink water - there is no doubt about this. ॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)