श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 70: तिल, जल, दीप तथा रत्न आदिके दानका माहात्म्य—धर्मराज और ब्राह्मणका संवाद  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.70.2 
भीष्म उवाच
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
ब्राह्मणस्य च संवादं यमस्य च युधिष्ठिर॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "युधिष्ठिर! इस प्रसंग में ब्राह्मण और यम के संवाद रूपी एक प्राचीन कथा का उदाहरण दिया जाता है॥ 2॥
 
Bhishma said, "Yudhishthira! In this context, an example of an ancient story in the form of a dialogue between a Brahmin and Yama is given.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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