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mahabharat 13.70.16: यम ने कहा - ब्रह्मर्षे ! तुम दान की उत्तम विधि को सत्यपूर्वक सुनो । तिलका दान सभी दानों में श्रेष्ठ है । यहाँ उसे अक्षय पुण्य देने वाला माना गया है । 16॥   |   mahabharat अध्याय 13.70: तिल, जल, दीप तथा रत्न आदिके दानका माहात्म्य—धर्मराज और ब्राह्मणका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 70: तिल, जल, दीप तथा रत्न आदिके दानका माहात्म्य—धर्मराज और ब्राह्मणका संवाद  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  13.70.16 
यम उवाच
शृणु तत्त्वेन विप्रर्षे प्रदानविधिमुत्तमम्।
तिला: परमकं दानं पुण्यं चैवेह शाश्वतम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
यम ने कहा - ब्रह्मर्षे ! तुम दान की उत्तम विधि को सत्यपूर्वक सुनो । तिलका दान सभी दानों में श्रेष्ठ है । यहाँ उसे अक्षय पुण्य देने वाला माना गया है । 16॥
 
Yama said – Brahmarshe! You truly listen to the best method of charity. Donating Tilka is the best among all donations. Here he is considered to be of inexhaustible virtue. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)