| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 70: तिल, जल, दीप तथा रत्न आदिके दानका माहात्म्य—धर्मराज और ब्राह्मणका संवाद » श्लोक 15 |
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| | | | श्लोक 13.70.15  | ब्राह्मण उवाच
यत् तत्र कृत्वा सुमहत् पुण्यं स्यात् तद् ब्रवीहि मे।
सर्वस्य हि प्रमाणं त्वं त्रैलोक्यस्यापि सत्तम॥ १५॥ | | | | | | अनुवाद | | ब्राह्मण ने कहा - ऋषि शिरोमणे! इस लोक में जिस कर्म को करने से महान पुण्य की प्राप्ति होती है, उसे आप मुझे बताइए; क्योंकि आप ही सम्पूर्ण जगत के लिए धर्म के प्रमाण हैं॥15॥ | | | | The Brahmin said – Sage Shiromane! Tell me the work that results in great virtue by doing it in this world; Because you are the proof regarding religion for the entire universe. 15॥ | | ✨ ai-generated | | |
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