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mahabharat 13.7.8: जो वानप्रस्थी रूप में वेदी पर सोते हैं, उन्हें अगले जन्म में उत्तम घर और शय्या प्राप्त होती है। जो वस्त्र और छाल के वस्त्र पहनते हैं, उन्हें अगले जन्म में उत्तम वस्त्र और आभूषण प्राप्त होते हैं ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 13.7: कर्मोंके फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 7: कर्मोंके फलका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.7.8 
स्थण्डिलेषु शयानानां गृहाणि शयनानि च।
चीरवल्कलसंवीते वासांस्याभरणानि च॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जो वानप्रस्थी रूप में वेदी पर सोते हैं, उन्हें अगले जन्म में उत्तम घर और शय्या प्राप्त होती है। जो वस्त्र और छाल के वस्त्र पहनते हैं, उन्हें अगले जन्म में उत्तम वस्त्र और आभूषण प्राप्त होते हैं ॥8॥
 
Those who sleep on the altar in the Vanaprasthi form get the best house and bed in their next birth. Those who wear cloth and bark clothes get the best clothes and ornaments in their next birth. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)