श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 7: कर्मोंके फलका वर्णन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  13.7.29 
इत्येतदृषिणा प्रोक्तमुक्तवानस्मि यद् विभो।
शुभाशुभफलप्राप्तौ किमत: श्रोतुमिच्छसि॥ २९॥
 
 
अनुवाद
राजन! शुभ-अशुभ फलों की प्राप्ति के विषय में महर्षि व्यास ने ये सब बातें बताई थीं, जो मैंने अब तुम्हें बताई हैं। अब तुम और क्या सुनना चाहते हो?
 
King! Maharishi Vyasa had told all these things about the attainment of auspicious and inauspicious results, which I have told you now. What else do you want to hear now?
 
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि कर्मफलिकोपाख्याने सप्तमोऽध्याय:॥ ७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें कर्मफलका उपाख्यानविषयक सातवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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