Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.7.19: पृथ्वीनाथ! जो मनुष्य बारह वर्ष तक व्रत का व्रत लेकर अन्न का त्याग करता है और तीर्थों में स्नान करता रहता है, वह युद्धभूमि में प्राण त्यागने वाले योद्धा से भी उत्तम लोक को प्राप्त होता है॥19॥ | mahabharat अध्याय 13.7: कर्मोंके फलका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उपवासं च दीक्षायामभिषेकं च पार्थिव।
कृत्वा द्वादश वर्षाणि वीरस्थानाद् विशिष्यते॥ १९॥
अनुवाद
पृथ्वीनाथ! जो मनुष्य बारह वर्ष तक व्रत का व्रत लेकर अन्न का त्याग करता है और तीर्थों में स्नान करता रहता है, वह युद्धभूमि में प्राण त्यागने वाले योद्धा से भी उत्तम लोक को प्राप्त होता है॥19॥
Prithvinath! A man who takes the vow of fasting for twelve years and gives up food and keeps bathing in holy places, attains a better world than a warrior who gives up his life on the battlefield.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥