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श्लोक 13.69.3  |
भीष्म उवाच
हन्त ते वर्तयिष्यामि यथावद् भरतर्षभ।
गदतस्तन्ममाद्येह शृणु सत्यपराक्रम॥ ३॥ |
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| अनुवाद |
| भीष्मजी कहते हैं- हे वीर एवं सत्यवादी भरत! मैं तुम्हें सब बातें यथार्थ रूप में बताता हूँ। आज यहाँ मुझसे ये सब बातें सुनो। |
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| Bhishmaji says- O brave and truthful Bharata! I will tell you everything in its true form. Listen to all these things from me here today. |
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