श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 69: अन्न और जलके दानकी महिमा  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.69.3 
भीष्म उवाच
हन्त ते वर्तयिष्यामि यथावद् भरतर्षभ।
गदतस्तन्ममाद्येह शृणु सत्यपराक्रम॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं- हे वीर एवं सत्यवादी भरत! मैं तुम्हें सब बातें यथार्थ रूप में बताता हूँ। आज यहाँ मुझसे ये सब बातें सुनो।
 
Bhishmaji says- O brave and truthful Bharata! I will tell you everything in its true form. Listen to all these things from me here today.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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