श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 69: अन्न और जलके दानकी महिमा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.69.2 
पानीयदानमेवैतत् कथं चेह महाफलम्।
इत्येतच्छ्रोतुमिच्छामि विस्तरेण पितामह॥ २॥
 
 
अनुवाद
दादाजी! अब मैं जलदान से होने वाले महान् फल के विषय में विस्तारपूर्वक सुनना चाहता हूँ॥ 2॥
 
Grandfather! Now I wish to hear in detail about the great benefits one receives by donating water.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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