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श्लोक 13.69.2  |
पानीयदानमेवैतत् कथं चेह महाफलम्।
इत्येतच्छ्रोतुमिच्छामि विस्तरेण पितामह॥ २॥ |
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| अनुवाद |
| दादाजी! अब मैं जलदान से होने वाले महान् फल के विषय में विस्तारपूर्वक सुनना चाहता हूँ॥ 2॥ |
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| Grandfather! Now I wish to hear in detail about the great benefits one receives by donating water.॥ 2॥ |
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