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mahabharat 13.68.52: जो मनुष्य ऐसे पापी मनुष्यों को गौ दान देता है, वह अनन्त नरक में पड़ता है, ऐसा महर्षि कहते हैं ॥52॥   |   mahabharat अध्याय 13.68: जूता, शकट, तिल, भूमि, गौ और अन्नके दानका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 68: जूता, शकट, तिल, भूमि, गौ और अन्नके दानका माहात्म्य  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  13.68.52 
ददत् स तादृशानां वै नरो गां पापकर्मणाम्।
अक्षयं नरकं यातीत्येवमाहुमर्हर्षय:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य ऐसे पापी मनुष्यों को गौ दान देता है, वह अनन्त नरक में पड़ता है, ऐसा महर्षि कहते हैं ॥52॥
 
The person who gives a cow to such sinful people falls into eternal hell, so say the great sages. ॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)