Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.68.51-d1h: भरतश्रेष्ठ! जो मनुष्य वध के लिए गौ माँगता है, उसे कभी गौ नहीं देनी चाहिए। इसी प्रकार कसाई, नास्तिक, गौ से जीविका चलाने वाले, गौ-विक्रेता तथा पंचयज्ञ न करने वाले को भी गौ नहीं देनी चाहिए। 51॥ | mahabharat अध्याय 13.68: जूता, शकट, तिल, भूमि, गौ और अन्नके दानका माहात्म्य । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न वधार्थं प्रदातव्या न कीनाशे न नास्तिके।
गोजीविने न दातव्या तथा गौर्भरतर्षभ॥ ५१॥
(गोरसानां न विक्रेतुरपञ्चयजनस्य च।)
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! जो मनुष्य वध के लिए गौ माँगता है, उसे कभी गौ नहीं देनी चाहिए। इसी प्रकार कसाई, नास्तिक, गौ से जीविका चलाने वाले, गौ-विक्रेता तथा पंचयज्ञ न करने वाले को भी गौ नहीं देनी चाहिए। 51॥
Bharatshrestha! A man who is asking for a cow for slaughter should never be given a cow. Similarly, one should not give a cow to a butcher, an atheist, a person who earns his living from cows, a cow-seller, or a person who does not perform Panchayagya. 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥